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P.P.F. (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड)
(सार्वजनिक भविष्यनिधि )

(1) सरकारी कर्मचारियों के लिए जो संचित निधि की व्यवस्था है, उसको जनरल प्रॉविडेंट फंड (जीपीएफ) कहा जाता है। इसमें केवल सरकारी कर्मचारियों का योगदान होता है, सरकार का कोई योगदान नहीं होता। संगठित व असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए संचित निधि की जो व्यवस्था है, उसको इम्प्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) कहा जाता है। इसमें नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का योगदान होता है। इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति ऐच्छिक रूप से जिस संचित निधि में निवेश कर सकता है, उसे पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) कहा जाता है।

(2) लम्बे निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा पी.पी.एफ.खाता को प्रोत्साहित किया जाता है।यह पोस्ट ऑफिस और सरकारी बैंकों में खोला जा सकता है। पी.पी.एफ.खाता एकल प्रकार का खाता होता है, जो स्वयं अथवा नाबालिग बच्चे के नाम से भी खोला जा सकता है। इसे पति-पत्नी दोनों के नाम से अलग-अलग भी खोला जा सकता है। यह खात आमतौर 15 वर्षों के लिएडिजाइन है, जिसे 15 वर्षों के बाद भी 5-5 वर्ष की अवधि के लिए जब तक आप चाहें, बढ़ाया जा सकता है।

(3) पी.पी.एफ. खाते में प्रत्येक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रू. व अधिकतम 1.5 लाख रू. जमा किये जा सकते हैं। यह धन राशि एक मुश्त अथवा 12 किश्तों में जमा की जा सकती है।

(4) इस खाते में जमा की जाने वाली राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत इनकम टैक्स में छूट प्राप्त होती है। इसी प्रकार पीपीएफ से प्राप्त मूलधन तथा ब्याज आयकर एवं सम्पत्ति कर से मुक्त होता है।

(5) इस स्कीम में इस साल ब्याज की दर 8.7 प्रतिशत है।

(6) पी.पी.एफ. में ब्याज की गणना वार्षित तौर पर होती है, लेकिन इसका आधार हर माह की 5 तारीख को खाते में उपलब्ध राशि के आधार पर किया जाता है। इसलिए खाता धारक को चाहिए कि वह माह की 01 से लेकर 05 तारीख के मध्य ही इस खाते में रूपये जमा करे, जिससे उसे अधिकाधिक लाभ प्राप्त हो सके।

(7) आवश्यक होने पर 3 वर्ष के बाद पीपीएफ खाते में जमा राशि से ऋण भी लिया जा सकता है।

(8) छठे वर्ष के बाद खाते से आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

(9) पीपीएफ खाते में किसी को भी नामित किया जा सकता है तथा मूल खाताधारी की मृत्यु की दशा मे नामित व्यक्ति को इस खाते का मालिक मान लिया जायेगा।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है मेरी राय में प्रत्येक कर्मचारी को पीपीएफ खाता अवश्य खुलाना चहिये व हर माह निश्चित बचत राशि जमा करनी चाहिए ।

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