Archive | December, 2012

एक फरवरी से बिना आधार कार्ड नहीं मिलेगी तनख्वाह!

27 Dec

एक फरवरी से बिना आधार कार्ड नहीं मिलेगी तनख्वाह!
.राज्य के कर्मचारियों को तनख्वाह के लिए एक फरवरी 2013 से आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है। मुख्य सचिव सीके मैथ्यु व वित्त विभाग के शासन सचिव अखिल अरोरा ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर एक फरवरी से पहले कर्मचारियों का आधार पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं।
सीकर जिले में करीब 30 हजार से अधिक कर्मचारी है। वित्त विभाग की ओर से भेजे गए पत्र के बाद कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। क्योंकि आधार नामांकन के लिए उनके पास सिर्फ एक महीना बचा है। आधार कार्ड में पंजीयन के लिए अब कई कर्मचारी तो अवकाश के दिनों में आधार पंजीयन के लिए जुटे हुए हैं। कर्मचारियों को कहना है कि कैंपों में कार्डके लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से कर्मचारियों के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई है। कोषाधिकारी सुमेरसिंह ने बताया कि वित्त विभाग से कर्मचारियों के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता संबंधी निर्देश मिल गए हैं। जानकारी के अनुसार, आधार कार्ड के नंबरों के आधार पर ही कर्मचारियों की तनख्वाह जारी की जाएगी।
इन सेवाओं के लिए आधार जरूरी :
वृद्धावस्था, विधवा एवं विकलांग पेंशन, नरेगा जॉब कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली-पानी कनेक्शन, संपत्ति पंजीकरण, भू-अभिलेखों का नामांतरण एवं नकल प्राप्त करना, इंदिरा आवास योजना व ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की व्यक्तिगत लाभ की योजनाएं, छात्रवृत्ति और शस्त्र लाइसेंस।
सीकर : अब तक बने साढ़े चार लाख कार्ड
: सीकर जिले में अब तक साढ़े चार लाख लोगों काआधार कार्ड बना है। जबकि करीब डेढ़ लाख लोगों का आधार कार्ड अंडर प्रोसेस चल रहा है।
: मार्च 2013 तक राज्य के करीब 2.5 करोड़ लोगों का आधार नामांकन कराने का लक्ष्य।
: दावा है अगले 17 महीने में सभी लोगों का आधार कार्ड बन जाएगा।
: राज्य में अब तक 91 लाख से अधिक आधार कार्ड बन चुके हैं।

Advertisements
Aside

Revised result Social science selected candidates

25 Dec

Rajasthan Public Service Commission (RPSC) |RAS Exam Results

http://results.indiaresults.com/Rajasthan/RPSC/notification/pdf/N1SEL_SO_25122012.htm

Revised result Social science selected candidates

Rpsc 2nd grade revised result of sst n maths

Aside

Revised result Social science selected candidates

25 Dec

Rajasthan Public Service Commission (RPSC) |RAS Exam Results

http://results.indiaresults.com/Rajasthan/RPSC/notification/pdf/N1SEL_SO_25122012.htm

Revised result Social science selected candidates

Rpsc 2nd grade revised result of sst n maths

HM भर्ती परीक्षा में एक्सपर्टकमेटी फेल

20 Dec

जयपुर/जोधपुर. प्रधानाध्यापकों (एचएम) की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में सही उत्तर खोजने के लिए गठित की गई एक्सपर्ट कमेटी भी फेल हो गई है। कमेटी की सिफारिशों के आधार परघोषित संशोधित आंसर-की के करीब 12 से 16 सवालों के उत्तर गलत और विवादित हैं।
इस आंसर-की के अनुसार रिजल्ट घोषित किया जा चुका है और ढाई हजार पदों पर नियुक्ति देने की तैयारी जारी है।
ऐसे में पूरी परीक्षा की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो कम अंकों के फासले से प्रधानाध्यापक बनने से वंचित रह जाएंगे। ऐसे परीक्षार्थियों का कहना है कि आयोग को अपने जवाब के पीछे एक्सपर्ट कमेटी के हर तर्क को सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे एकराय बन सके।
एक्सपर्ट कमेटी के इन उत्तरों पर उठ रहे हैं सवाल
सीरीज – बी, पेपर-प्रथम, प्रश्न – 9 : 2001-11 के दशक में राजस्थान का सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि वाला जिला है-
विकल्प: 1-जैसलमेर, 2-जोधपुर, 3-बाड़मेर, 4-जयपुर
मॉडल की में उत्तर: बाड़मेर, कमेटी: बाड़मेर
सही उत्तर- जयपुर (स्त्रोत: सूजस राजस्थान)।
सीरीज-बी, पेपर-द्वितीय, प्रश्न-144 : राज्य में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू करने की दृष्टि से जिन नियमों का प्रथमत: निर्माण किया गया उनका शीर्षक लिखा गया-
विकल्प: 1-निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार 2009
2-राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2010
3-राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा नियम 2012
4-राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम-2009
मॉडल की में उत्तर : 2, एक्सपर्ट कमेटी का उत्तर : 2
सही उत्तर: इसी पेपर में अगले ही प्रश्न में लिखा है बाल शिक्षा नियम-2011
प्रश्न:82, सीरीज: बी, पेपर-द्वितीय: चीन का प्रधानमंत्री कौन है?
विकल्प: 1- हू-जिनताओ, 2-लो-पेंग, 3-जेन जियाबाओ, 4-बो-जिलाई
मॉडल की में आयोग का उत्तर: 3
एक्सपर्ट कमेटी: 3
सही उत्तर: वेन जिआ बाओ। स्त्रोत: ( चीन सरकारकी वेबसाइट) यह डिलीट श्रेणी में होना चाहिए।
प्रश्न:14, सीरीज: बी, पेपर-द्वितीय राजस्थानराज्य पाठ्यपुस्तक मंडल का गठन किस वर्ष हुआ?
विकल्प: 1-1973, 2-1975, 3-19, 4-1979
मॉडल की में आयोग का उत्तर: डिलीट
एक्सपर्ट कमेटी: नई आंसर में भी प्रश्न हटाया
सही उत्तर है-1973 (यह उत्तर पाठ्यपुस्तक मंडल की वेबसाइट के होमपेज पर है)
प्रश्न:50, सीरीज: बी, पेपर-प्रथम 2,11,47, 191, 767
विकल्प: 1-2891, 2-3068, 3-3058, 4-9451
मॉडल की में आयोग का उत्तर: 3
एक्सपर्ट कमेटी: नई आंसर की से प्रश्न हटाया
सही उत्तर: 2891(गणितीय तर्क के अनुसार सिंगल डिजीट में करने पर सबका योग दो आता है)
22 सवाल डिलीट किए, 21 के उत्तर बदले
आरपीएससी ने एचएम भर्ती परीक्षा 15 मई को ली थी। इसकी मॉडल आंसर की 9 अक्टूबर को जारी करने के साथ ही आपत्तियां मांगी गईं। बड़ी संख्या में आपत्तियां आईं। इसके बाद आयोग नेएक्सपर्ट कमेटी के जरिए संशोधित आंसर की जारी की और 18 नवंबर को रिजल्ट घोषित कर दिया। नई आंसर-की 19 नवंबर को जारी की गई। इसमें 22 सवाल डिलीट किए गए, जबकि मॉडल-की में दिए गए 21 उत्तरों को भी बदला गया।
सभी उत्तरों पर कोई संतुष्ट नहीं होता
‘सभी उत्तरों पर कोई भी संतुष्ट नहीं होता। यह कभी खत्म नहीं होने वाला सिलसिला है। आयोग ने पड़ताल कर रिजल्ट जारी किया है। किसी भी उत्तर पर राय जुदा-जुदा हो सकती हैं।आयोग ने अपना काम पूरा कर लिया, अब विभाग को नियुक्तियां देनी हैं।’
-हबीब खान गौराण, चेयरमैन, आरपीएससी
16 सवालों के गलत जवाब
आरपीएससी आंसर की में करीब 16 सवालों के जवाब सही नहीं हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अधिकारी बनने से वंचित रह जाएंगे। सरकार को दखल कर परीक्षा ही निरस्त करनी चाहिए।
– हनुमानराम चौधरी, अध्यक्ष, भर्ती संघर्ष समिति

Rpsc revised answer key of IInd grade 2011.

11 Dec

http://rpsc.rajasthan.gov.in/PDF_Reports_Files/Key_Science_II_Grade_Exam_2011_11_12_2012.pdf

http://rpsc.rajasthan.gov.in/PDF_Reports_Files/Key_Hindi_II_Grade_Exam_2011_11_12_2012.pdf

http://rpsc.rajasthan.gov.in/PDF_Reports_Files/Key_ENG_II_Grade_Exam_2011_11_12_2012.pdf

तैमूरलंग

11 Dec

तैमूरलंग इतिहास में एक खूनी योद्धा के तौर पर मशहूर हुए. 14वीं शताब्दी में उन्होंने युद्ध के मैदान में कई देशों की जीता. कहते हैं कि तैमूरलंग को अपने दुश्मनों के सिर काटकर जमा करने का शौक था.
‘तैमूरलंग: इस्लाम की तलवार, विश्व विजेता’ केलेखक जस्टिन मारोज्जी के मुताबिक वह जमाना ऐसा था कि यु्द्ध बाहुबल से लड़ा जाता था, बम और बंदूकों के सहारे नहीं. ऐसे में तैमूरलंग की उपलब्धि किसी को भी अचरज में डाल सकती है.
अगर इतिहास के महान योद्धाओं और विजेताओं के बारे में सोचें तो चंगेज़ ख़ान और सिकंदर महान के नाम याद आते हैं. लेकिन अगर आप मध्य एशियाई और मुस्लिम देशों के बारे में थोड़ा बहुत भी जानते होंगे तो ये सूची तैमूरलंग के बिना पूरी नहीं होगी.
तैमूरलंग का जन्म समरकंद में 1336 में हुआ था. ये इलाका अब उजबेकिस्तान के नाम से मशहूर है. कई मायनों में तैमूरलंग सिकंदर महान और चंगेज़ ख़ान से कहीं ज्यादा चमकदार शख्सियत के मालिक थे.
मामूली चोर थे तैमूरलंग
हालांकि सिकंदर की तरह तैमूरलंग राजपरिवार में पैदा नहीं हुए, बल्कि उनका जन्म एक आम परिवार में हुआ था. तैमूरलंग एक मामूली चोर थे, जो मध्य एशिया के मैदानों और पहाड़ियों से भेड़ों की चोरी किया करते थे.
चंगेज़ ख़ान की तरह तैमूरलंग के पास कोई सिपाही भी नहीं था. लेकिन उन्होंने आम झगड़ालू लोगों की मदद से एक बेहतरीन सेना बनाली जो किसी अचरज से कम नहीं था.
जब तैमूरलंग 1402 में सुल्तान बायाजिद प्रथम के खिलाफ युद्ध मैदान में उतरे, तब उनके पास भारी भरकम सेना थी जिसमें अर्मेनिया से अफगानिस्तान और समरकंद से लेकरसर्बिया तक के सैनिक शामिल थे.
वह एक योद्धा थे, जो एक किसान से एशिया के सिंहासन पर काबिज हुआ. उसकी विकलांगता ने उसके रवैये और हौसले को प्रभावित नहीं किया. उसने अपनी दुर्बलताओं पर भी विजय प्राप्त कर ली थी. ”
एडवर्ड गिब्बन, 18वीं सदी के इतिहासकार
तैमूरलंग अपने जीवन में इन मुश्किलों से पार पाने में कामयाब रहे लेकिन सबसे हैरानी वाली बात यह है कि वे विकलांग थे. आपको भले यकीन नहीं हो लेकिन हकीकत यही है कि उनके शरीर का दायां हिस्सा पूरी तरह से दुरुस्त नहीं था.
हादसे में हुए विकलांग
जन्म के समय उनका नाम तैमूर रखा गया था. तैमूरका मतलब लोहा होता है. आगे चलकर लोग उन्हें फारसी में मजाक मजाक में तैमूर-ए-लंग (लंगड़ातैमूर) कहने लगे.
इस मजाक की शुरुआत भी तब हुई जब युवावस्था में उनके शरीर का दाहिना हिस्सा बुरी तरह घायल हो गया था. इसके बाद यही नाम बिगड़ते बिगड़ते तैमूरलंग हो गया.
लेकिन तैमूरलंग के सफ़र में उनकी शारीरिक विकलांगता आड़े नहीं आई, जबकि वह जमाना ऐसा था जब राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए शारीरिक सौष्ठव भी जरूरी था.
युवा तैमूरलंग के बारे में कहा जाता है कि वह महज एक हाथ से तलवार पकड़ सकते थे. ऐसे में ये समझ से बाहर है कि तैमूरलंग ने खुद को हाथ से हाथ की लड़ाई और घुड़सवारी और तीरंदाज़ी के लायक कैसे बनाया होगा.
समरकंद स्थित तैमूरलंग का मक़बरा
इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि तैमूरलंग बुरी तरह घायल होने के बाद विकलांग हो गए थे. हालांकि इस बात पर अनिश्चितता जरूर है कि उनके साथ क्या हादसा हुआ था.
वैसे अनुमान यह है कि यह हादसा 1363 के करीब हुआ था. तब तैमूरलंग भाड़े के मजदूर के तौर परखुर्शान में पड़ने वाले खानों में काम कर रहेथे, दक्षिण पश्चिम अफगानिस्तान में स्थित इस हिस्से को आजकल मौत का रेगिस्तान कहा जाता है.
एक अन्य स्रोत- लगभग शत्रुता वाला भाव रखने वाले 15वीं शताब्दी के सीरियाई इतिहासकार इब्ने अरब शाह के मुताबिक एक भेड़ चराने वालेचरवाहा ने भेड़ चुराते हुए तैमूरलंग को अपने तीर से घायल कर दिया था. चरवाहे का एक तीर तैमूर के कंधे पर लगा था और दूसरा तीर कूल्हे पर.
सीरियाई इतिहासकार ने तिरस्कारपूर्ण अंदाज में लिखा है, “पूरी तरह से घायल होने से तैमूरलंग की गरीबी बढ़ गई. उसकी दुष्टता भी बढ़ी और रोष भी बढ़ता गया.”
स्पेनिश राजदूत क्लेविजो ने 1404 में समरकंद का दौरा किया था. उन्होंने लिखा है कि सिस्तान के घुड़सवारों का सामना करते हुए तैमूरलंग घायल हुए थे.
उनके मुताबिक, “दुश्मनों ने तैमूरलंग को घोड़े से गिरा दिया और उनके दाहिने पैर को जख्मी कर दिया, इसके चलते वह जीवन भर लंगड़ाते रहे, बाद में उनका दाहिना हाथ भी जख्मी हो गया. उन्होंने अपने हाथ की दो उंगलियां गंवाई थी.”
सोवियत पुरातत्वविदों का एक दल जिसका नेतृत्व मिखाइल गेरिसिमोव कर रहे थे, ने 1941 में समरकंद स्थित तैमूरलंग के खूबसूरत मक़बरे को खुदवाया था और पाया कि वे लंगड़े थे लेकिन 5 फुट 7 इंच का उनका शरीर कसा हुआ था.
उजबेकिस्तान में लगी तैमूरलंग की प्रतिमा
उनका दाहिना पैर, जहां जांघ की हड्डी और घुटने मिलते हैं, वह जख्मी था. इसके चलते उनकादाहिना पैर बाएं पैर के मुकाबले छोटा था. यही वजह है कि उनका नाम ‘लंगड़ा’ तैमूर पड़ गया था.
विकलांगता नहीं बनी बाधा
चलते समय उन्हें अपने दाहिने पांव को घसीटना पड़ता था. इसके अलावा उनका बायां कंधा दाएं कंधे के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा ऊंचा था. उनकेदाहिने हाथ और कोहनी भी बाद में ज़ख्मी हो गए.
पूरी तरह से घायल होने से तैमूरलंग की गरीबी बढ़ गई. उसकी दुष्टता भी बढ़ी और रोष भी बढ़तागया. ”
इब्ने अरब शाह, 15वीं सदी के सीरियाई इतिहासकार
बावजूद इसके 14वीं शताब्दी के उनके दुश्मन जिनमें तुर्की, बगदाद और सीरिया के शासक शामिल थे, उनका मजाक उड़ाते थे लेकिन युद्ध में तैमूरलंग को हरा पाना मजाक उड़ाने जितना आसान कभी नहीं रहा.
तैमूरलंग के कट्टर आलोचक रहे अरबशाह ने भी माना है कि तैमूरलंग में ताकत और साहस कूट कूट कर भरा हुआ था और उन्हें देखकर दूसरों में भय और आदेश पालन का भाव मन में आता था.
कभी नहीं हारे तैमूरलंग

ओलंपिक:भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन,पर राह लंबी

7 Dec

दुनिया जहां ऊपर चढ़ने के लिए एस्केलेटर यानी स्वचालित सीढ़ियों का सहारा ले रही है, वहीं भारतीय खिलाड़ी अभी भी सीढ़ियों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.
साल 1996 से लेकर 2004 तक के ओलंपिक की बात करें तो एक समय में हमारे पास सिर्फ एक पदक था, उसके बाद ये बढ़कर तीन हुआ और अब ये दोगुना होकर छह तक पहुंचा है.
एक स्वर्ण पदक और दो रजत पदक से बढ़कर इस बार दो रजत और चार कांस्य पदक इस बार भारत की झोलीमें आए हैं और कई पदक जरा सी चूक की वजह से आनेसे रह गए.
सुशील कुमार ने साबित कर दिया कि वो भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ ओलंपियन हैं. उनका रजत पदक, स्वर्ण के बिल्कुल करीब, लेकिन सेमीफाइनल और फाइनल के बीच पेट की समस्या ने उन्हें इस मौके से वंचित कर दिया. इस वजह से सुशील लंदन में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक लाने में नाकाम रहे.
इसके अलावा वो अपने जापानी प्रतिद्वंद्वी तातसुहिरो योनेमित्सु से कम से कम तीन इंच छोटे थे जिन्होंने 2010 में सुशील की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए चीन में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता था. इस बार उन्होंने सुशील को हराकर स्वर्ण पदक जीता.
यदि लंदन ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय स्टार खिलाड़ियों की बात करें तो सिर्फ एमसी मैरीकॉम ही अपने करियर का उत्कृष्ट समापन करते हुए दिखीं, लेकिन बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, बॉक्सर देवेंद्रो और दुर्भाग्यशाली रहे विकास कृष्णन दोनों अभी भी किशोर हैं और उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल है.
हालांकि विजेंदर के पास भी अभी ज्यादा भार वर्ग में एक और मौका है.
सुशील कुमार अभी सिर्फ 29 साल के हैं और ये उनका तीसरा ओलंपिक था. कांस्य पदक जीतने वालेयोगेश्वर दत्त भी 29 साल के ही हैं, जबकि महज क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले अमित कुमार महज 19 साल के ही हैं. वे बहुत ही दुर्भाग्यशाली रहे जब कुश्ती के टाई ब्रेक में उन्हें मैच गँवाना पड़ा.
लंदन में ओलंपिक खेलों का शानदार समापन हुआ
निशानेबाजों की मौजूदा खेप भी लंबे समय तक खेल जारी रख सकती है. इसलिए आने वाले दिनों में गगन नारंग, विजय कुमार, मानवजीत संधू, रोंजन सोढ़ी के पास अभी समय है. जॉयदीप कर्माकर चौथे स्थान पर रहे जबकि 21 वर्षीया हिना सिद्धू के पास 10 मी. एअर पिस्टल में बढ़िया भविष्य है.
नाकाफी
लेकिन यदि 1.2 अरब की जनसंख्या को ध्यान में रखा जाए तो छह पदकों को नगण्य ही कहा जाएगा.
इसका मतलब तो यही हुआ कि भारत में हर बीस करोड़ की आबादी पर सिर्फ एक पदक हासिल हुआ.
अभी भी यह कहने से कोई गुरेज नहीं है कि भारत एक खिलाड़ी देश नहीं है. भारत एक ऐसा देश है जिसे अभी ओलंपिक पदकों से कहीं ज्यादा शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना की जरूरत है.
खिलाड़ी तभी बेहतर कर पाएंगे जब हम उन पर और अधिक पैसा खर्च कर सकेंगे. तभी वो दुनिया भर में भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे.
लेकिन यदि इसे दूसरे तरीके से देखों तो यही पैसा कहीं और भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे लोगों को खाना, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य मिल सकता है.
यदि स्वस्थ और शिक्षित बच्चे होंगे तो बाद में वो ही पदक हासिल करने की स्थिति में आ सकते हैं.
संस्कृति
नेल्सन मंडेला
खेल में प्रेरणा देने की शक्ति होती है, इसमें लोगों को जोड़ने की शक्ति होती है, न सिर्फ लोगों को बल्कि देशों को भी ”
दरअसल, खेल अभी भी हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है और अभी भी इसे लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी रहती है. नेल्सन मंडेला के उस वक्तव्य की वास्तविकता से हम अभी भी दूर हैं जब उन्होंनेएक बार कहा था कि खेलों में बदलाव की शक्ति होती है.
मंडेला ने आगे कहा था, “खेल में प्रेरणा देने की शक्ति होती है, इसमें लोगों को जोड़ने की शक्ति होती है, न सिर्फ लोगों को बल्कि देशों को भी.”
ग्रेट ब्रिटेन जैसे-जैसे एक के बाद एक पदक बटोरता गया और आश्चर्यजनक रूप से अमरीका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर आ गया, आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे इस देश ने एकता का जो अनुभव किया, वो इससे पहले कभी नहीं किया था.
खेलों की जैसे ही शुरुआत हुई, अर्थशास्त्रियों ने घोषणा कर दी कि ग्रेट ब्रिटेन वास्तव में खतरनाक दोहरी मंदी की चपेट में था.
फिर भी, सात साल से जब से लंदन में खेलों के होने की घोषणा हुई थी, पूर्वी लंदन के निवासियों को वो बदलाव देखने को मिला जो कि पिछले पचास साल में कभी नहीं मिला था.
खेल, हर उस सिक्के की तरह है जिसके दो पहलू होते हैं.
राष्ट्रमंडल खेल
दो साल पहले, तमाम स्कैंडल्स के चलते नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों को पटरी से उतारने की कोशिश की गई थी, बावजूद इसके एथलीट्स ने इसे अब तक का भारतीय खेलों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बना दिया.
न सिर्फ एक बेहतर शुभारंभ हुआ बल्कि 38 स्वर्ण पदक समेत कुल 101 पदकों के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने जोरदार प्रदर्शन भी किया.
स्वर्ण पदकों की संख्या में भारत ने ग्रेट ब्रिटेन को भी पछाड़ दिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कुल पदकों के लिहाज से उसे ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बाद तीसरा स्थान हासिल हुआ.
निशानेबाजी, कुश्ती और बॉक्सिंग के क्षेत्र में न सिर्फ बेहतर प्रगति हुई है बल्कि पिछलेतीन खेलों से इन क्षेत्रों में भारत को पदक भी मिले हैं.
टॉप-100
योगेश्वर दत्त ने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता
बैडमिंटन में भी भारत के कम से कम दस खिलाड़ी ऐसे हैं जो कि सौ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और दुनिया में छा जाने की उनमें क्षमता है.
केवल मलेशिया ही वो देश है जिसके दस खिलाड़ी टॉप सौ में शामिल हैं, जबकि डेनमार्क के नौ, इंडोनेशिया के सात और चीन के सिर्फ पांच खिलाड़ी ही टॉप सौ में शामिल हैं. चीन के ये सभी पांचों खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ बीस खिलाड़ियों में शामिल हैं